जोगी ना सही
खोजी ही सही
कैसे भी मिले
मिल जाए तो
हम इंतज़ार मैं बैठे है
कोई सूरत तो दिखलाए तो
मंदिर मे मिले चाहे जिगर मे
हर जगह बैठे है आस लगाए
आज का तुलसी बनकर बैठा हूँ
की चंदन कोई लगाए तो
भक्ति से नही तो शक्ति से सही
पुण्य से नही तो पापो से सही
कैसा भी उनका दरस तो हो
हम मरने को तैयार खड़े है
वो आकर शस्त्र उठाए तो

बाँसुरी सुनना चाहते है
बेर हम भी चुनना चाहते है
खिलाने को तैयार है हम
वो आकर कुछ खा जाए तो
शास्त्र पुराण सब छोड़ दूँगा
एक बार आवाज़ मे अपनी
वो नाम मेरा कह जाए तो
लोग सपनो मे देखा करते है
मैं जीवन भर सोता रहूँगा
गर तू सपना बन जाए तो
एक बार आ जाए तो
इन्तज़ार मे बैठे है
सूरत तो दिखलाए तो

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