-santosh kumar

 

सूरज अभी तक उगा नही था. भोर का समय था. कडकडाती ठंड मे सब बिस्तर मे मुंह ढके  सोए पड़े थे. पर उस ठंड में भी  एक कोने पर चाय की ठेली  लगा कर बैठा था एक दुकानदार. और ग्राहक कौन- रात के समय काम करते मजदूर. पर उनके अलावा एक नायाब ग्राहक रोज़ आते थे चाय पीने. प्रकाश. कभी आर्मी मे थे अब सेना के प्रशासनिक विभाग मे भेज दिया गया था. रोज़ सुबह उल्लू की तरह जाग जाते. और दो स्वेटर एक के उपर एक डालकर बाहर आ जाते.

 

चाय वाला: “साहब आप इतनी सुबह सुबह उठ कैसे जाते हो?”

प्रकाश: “जैसे तुम उठते हो”

चाय वाला: “हमारी तो रोज़ी रोटी का सवाल है. आप तो अफसर  है. आपको क्या ज़रूरत है?”

प्रकाश: “मुझे इनसॉमनिया है”

चाय वाला: “क्या?”

प्रकाश: “मतलब मुझे नींद ना आने की बीमारी है”

चाय वाला: “आपका कोई घर परिवार भी है हुज़ूर”

प्रकाश: “नही, कोई नही है. अपनी उम्र तो जोश और जुनून मे बिता दी, लीडर के भरोसे. अब जब जवानी ढल गयी है और लीडर भी नही रहे तो बड़ा सूना सूना लगता है”

चाय वाला: “लीडर को हुआ क्या?”

प्रकाश: “कौन जाने. कोई कहते है मर गये कोई कहते है ज़िंदा है”

 

“मेरा दिल कहता है वो ज़िंदा है”- पीछे से एक आवाज़ आती है. घनी दाढ़ी वाले और मैला सा चोगा पहने एक बुजुर्ग दिखाई पड़ते  है

“आपकी तारीफ?” प्रकाश ने कुछ नाराज़गी से पूछा

“बाबा जी बैठो”  चाय  वाला कहता है. “बड़े सिद्ध बाबा है. अभी कुछ दिन पहले ही पधारे है हमारे यहाँ”

 

“आप लीडर के बारे मे कुछ जानते भी है?” प्रकाश ने बेरूख़ी से पूछा

 

“वैसे तो कुछ नही जनता. नाम बहुत सुना है, पर कभी मिला नही. जब हमारी उम्र थी तो बहुत ख्याति थी उनकी. अपना दिल नही मानता की वो अब नही रहे”

 

“सच है. मानने का जी तो नही चाहता पर…. एरोप्लेन क्रैश  के बारे मे तो सब जानते है”

 

चाय वाले ने कहा- “कुछ बताइए ना उनके बारे मे. क्या क्या हुआ उनके साथ. उनकी बात, अपनी बात”

 

“ठीक है, एक और चाय बनाओ फिर”

जी हुज़ूर कहता हुआ चाय वाला चाय बनाने लगता है और साथ ही साथ प्रकाश की बात भी सुनने लगता है. बुजुर्ग बाबा भी शांत चित्त से टकटकी लगाये प्रकाश को देख रहे थे.

 

“ लीडर, उनकी शख्सियत ही कुछ और थी, सब से अलग थे. लाखों की भीड़ में भी अलग नज़र आते थे. उनके साथ मुलाकात तब हुई जब वो पॉलिटिक्स मे आए. तब तक हमे बस ये पता था कि  वो आई ए. एस अफसर  थे कभी,  पर उनके हर काम में मंत्री लोगों का टांग अडाना उन्हें अखरता था. बेवजह की चापलूसी वाली नौकरी उन्हें नही सुहाई, ज़्यादा पावर की चाह थी तो पॉलिटिक्स मे आ गये. दिमाग़ से बहुत तेज़ था और प्रैक्टिकल आदमी थे और प्रखर वक्ता भी,  तो जल्दी ही एक बड़ी पोलिटिकल पार्टी मे जगह बना ली

उनकी पार्टी प्रमुख विरोधी दल की भूमिका में थी,  तो जायज़ सी बात थी सत्ता दल के काम की आलोचना करना उनका परम उद्देश्य था. वो समय ही ऐसा था. हर जगह उथल पुथल थी. मैं उस टाइम कॉलेज मे पढ़ता था. स्टूडेंट यूनियन का मेंबर भी था. लीडर की पर्सनॅलिटी ग़ज़ब की थी. भाषण देते थे तो लगता था की अगर खून भी माँग ले तो वो भी न्योछावर कर दे. हमने कई बार उनके साथ हड़ताले की, रैलियों मे भाग लिया. तब एक बार एक पोलिटिकल मीटिंग मे प्रत्यक्ष संवाद हुआ. फिर जो साथ बना वो कभी टूटा नही

उन्होने ही मुझको कहा था कि उनकी दिल की तमन्ना थी कि  फौज मे जाकर देश की सेवा करे. पर रिस्की प्रोफेशन था तो परिवार ने मना किया. बोला अगर देश की सेवा करनी हो सिविल सर्विस दे दे. वो उसे अपनी सबसे बड़ी भूल मानते थे. उनके विचार अलग भी थे और खतरनाक भी. वो कहा करते थे- “इस देश को ज़रूरत है रेवोल्यूशन की ,आर्म्ड रेवोल्यूशन की”.

उनकी इस बात का मुझपर गहरा असर हुआ. कुछ महीनो मे सी. डी. एस में चयन हो गया. ट्रैनिंग लेकर अफसर बना. इन कुछ सालो मे लेटर्स और फोन के ज़रिए संपर्क  मे रहे. पता चला चुनाव मे लीडर की पार्टी जीत गयी है. सुनकर बहुत खुशी मिली कि चलो अब  देश का भला होगा.

पर कुछ सालो बाद जब उनसे मुलाकात हुई तो उनको अप्रसन्न ही पाया

मुझसे कहा- “पहले विरोधियो से लड़ रहे थे अब अपने आदमियो से लड़ रहा हूँ. पार्टी का अध्यक्ष अपनी चलाता है और पार्टी वाले लोग- वो तो उस सोशियल वर्कर के अंध भक्त बने हुए है. कहता है मैं किसी पार्टी का नही सबका भला चाहता हूँ और यही कह कह कर वो पार्टी मे फूट डाल  रहा है”

याद है मुझे. वो सोशियल वर्कर एक समय बैरिस्टर थे विदेश मे.  कई साल वकालत करके भारत लौट आये.पिछले एक दशक से राष्ट्र नेता बनकर उभरे थे. पर लीडर और उनकी कभी नही बनी

लीडर कहते थे मुझसे-  “ये राष्ट्र नेता चाहता है कि हम दुश्मन का प्रतिकार ना करे. ये लोग देश के विद्रोहियो को दुश्मन मानते है पर बाहर के दुश्मनो को दोस्त. इनका बस चले तो आतंकवादियो से भी सुलह कर ले”.

ये थोड़ी अतिशयोक्ति थी.  राष्ट्र नेता शांति के दूत थे और लीडर को मिलिटरी से प्यार था.  विचारधारा की लड़ाई कब दिलो में घर कर जाती है ये पता  ही नहीं चलता.

“मेरी पोस्टिंग लीडर से दूर हुई तो कुछ समय  तक उनसे दूरी रही. बस ये खबर आती रही की लीडर अपनी पार्टी से अलग थलग पड़  रहे है. पर समस्या कितनी गहरी है इसका अंदाज़ा हमे बाद मे ही लगा.

हमारे कुछ सिपाही सरहद पार की फाइरिंग मे मारे गये थे. जनता मे आक्रोश था. उपर से मीडिया का रोल. आग में घी नहीं घी में आग डालते है ये तो.

एक दिन अचानक से फोन आया. फोन पे लीडर थे. बोला मैं तुम्हारे शहर मे हूँ. तुमसे मिलना चाहता हूँ जल्द से जल्द.

वैसे तो कैंट एरिया से बाहर जाने मे कई तरह की झंझट है पर लीडर से मिलने की ख्वाहिश ऐसी थी की मैने परवाह नही की.

तय वक़्त मे तय जगह पहुंचा  तो लीडर मेरा इंतज़ार कर रहे थे

लीडर: “तुम्हारी हेल्प चाहिए प्रकाश”

प्रकाश: “जान हाज़िर है लीडर”

लीडर:“हाँ समझ लो, वही चाहिए. देश पर हमले  हो रहे है. कब तक चुपचाप बैठोगे?”

प्रकाश: “पर लीडर फाइरिंग दोनो तरफ से हो रही है”

लीडर: “शुरू कौन कर रहा है?”

प्रकाश: “इस सवाल का तो कोई जवाब नही है.”

लीडर: “ये लोग देश को बांटने  के बारे मे सोच रहे है”

प्रकाश: “कितने टुकड़े करेंगे और? वैसी ही दो देश बन गये हमारे देश से?”

लीडर: “जब तक इनकी सत्ता की भूख रहेगी. देश तब तक बंटता रहेगा. हमें  रोकना पड़ेगा इसे”

प्रकाश: कैसे लीडर?

लीडर: प्रकाश वी नीड अवर ओन आर्मी.अ  गौरिल्ला  आर्मी

प्रकाश: ये देश के साथ धोखा नही होगा लीडर

लीडर: नही बिलकुल नहीं. हम तो  देश को बचाने के लिए के लिए लड़ रहे है.

प्रकाश: अपनी सरकार के खिलाफ?

लीडर: नही रेबेल फोर्सस के खिलाफ. सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ और देश के दुश्मनों के खिलाफ

मुझे ये काम कुछ सही नही लगा पर लीडर का विश्वास देखकर मुझे लगा कि मुझे ये काम करना चाहिए. अगर सही रहा तो देश की सेवा हार भी गये तो लीडर की सेवा

 

मैने एक सीक्रेट मीटिंग बुलाई,  केवल उन लोगो की जो हमारे काम आ सकते थे. कुछ लोग मान गये. और जो नही माने उनसे ये वचन ले लिया की वो किसी से कुछ नही कहेंगे. तय हुआ कि  सब कुछ कुछ दिन के अंतराल मे छुट्टी लेंगे ताकि सहूलियत हो और शक भी ना हो. जब हमारी फोर्स जमा हुई तो पता चला की लीडर ने गांव गांव जाकर भारी संख्या मे लोगो को जमा कर लिया था.

“लोग हमारे पास काफ़ी है. हथियार और रसद आ जयगी कल तक. अभी के लिए पैसा भी है पर हमारी लड़ाई लंबी है. इतने से कुछ नही होगा. हमे सबका सहयोग और सबसे सहयोग चाहिए. लेकिन एक चीज़ जो हमारे पास नही हैं वो है सपोर्ट. हमे किसी ऐसी एजेन्सी किसी ऐसे ग्रूप का सपोर्ट चाहिए जो हमे पावर भी दे और हमारे अस्तित्व को स्वीकृति भी”. ये कहकर लीडर ने हुंकार भरी ‘वन्दे मातरम’ की जिससे पूरा आसमान गूँज उठा.

पर मैने जब लीडर की आर्मी ज्वाइन  की थी तो मैं नही जानता था की लड़ाई कितनी लंबी होगी. हमने जो किया वो आर्मी और देश दोनो के उसूलों के खिलाफ था. इतने सारे सैनिको और अफसरों के अचानक छुट्टी पर चले जाने से शायद सरकार को भी भनक लग गयी थी कि कुछ गड़बड़ है. इस दौरान हमने कई गॉरिला वारफेयर  के कैंप्स लगाए. हमारा लक्ष्य था कि बॉर्डर पे तैनात सिपाहियो की मदद से दुश्मनो के ख़ुफ़िया ठिकानो का पता लगाया जाए. कुछ अफसरों  से बात हुई जो चोरी छुपे हमे सपोर्ट देने को तैयार थे. पर ऐन टाइम पर वो लोग दगा दे गये. सही समय पर सप्लाई और सही इनफार्मेशन न मिलने से हमारी लड़ाई अंजाम पर पहुँचने से पहले ही थम गयी. हमारे कई लोग मारे गये, कई लोग पकड़े गये. मैं लीडर और कुछ गिने चुने लोग भेष बदल के भाग निकले. लीडर ने डिसाइड किया की अब देश मे रहना ठीक नही. लीडर देश छोड़  के चले गये और हम बिना किसी सहारे के, छुट्टियाँ ख़त्म होने से पहले ही रेजिमेंट लौट आये.

सरकार को हम पर शक था पर शायद वो सब लीडर से वाकिफ थे इसलिए निष्कासन न होकर समझौता हुआ. हम लोगों को सतही कारवाही के बाद वापस सेना में ले लिया गया.कुछ महीनो बाद ये खबर आई की लीडर का प्लेन क्रैश हो गया और उनकी मृत्यु  हो गयी. हमारे अंदर का सारा जोश सारा जुनून मर गया. मैने सिर्फ़ लीडर ही नही अपना गुरु अपना दोस्त खोया था.

 

बोलते बोलते प्रकाश  की आँखे भर आई.

“तुम्हारी कहानी अधूरी है”- बाबा अचानक बोल पड़े

“क्या?”

“मैने कहा तुमने पूरी कहानी नही सुनाई”

“तो पूरी कहानी क्या बाबा”- चाय वाले ने चमत्कार की आशा से पूछा.

बाबा ने एक नज़र प्रकाश को देखा, फिर बोले- “लीडर कभी मरा नही. उसे सरकार के कहने पर विदेश मे ही नज़रबंद कर दिया गया.”

लीडर के साथ के सभी लोगो को आर्मी मे भरती कर लिया गया. लेकिन एक शर्त के साथ

“कैसी शर्त?” चाय वाले ने पूछा

“सभी ठिकानो, हथियारो और पैसे का पता, और दूसरा लीडर की मौत की झूठी कहानी गढ़ने की. प्लेन का क्रैश होना लीडर का मरना सब एक साजिश थी. है ना मिस्टर. प्रकाश

प्रकाश  झेंप गया. चाय वाला बोला-  “आप तो सिद्ध हो बाबा!! चमत्कार!!

प्रकाश चिल्लाया-  “कोई चमत्कार नही है ये. ए बाबा बताओ कौन हो तुम?”

बाबा सवाल का जवाब देने की बजाय गोल घूमते रहे. “विदेश से लीडर इस शर्त पर रिहा हुए कि अपनी पहचान किसी को नही बताएँगे”

इधर उधर घूमते भटकते अपने देश पहुँचे. इतने सालो मे लोग लीडर को  भूल गये थे. दबी ज़बान से अपनी मौत के किस्से भी सुने उसने. और क्या करता. ना पैसा था ना पहचान, बाबा बन गए”

अभी तक प्रशांत उनकी बात को अनसुना कर रहा था पर ये शब्द उसके कानो मे गूँज गये. अब तक सूरज निकलने लगा था. उसने गौर से देखा. घनी दाढ़ी के बीच छुपा चेहरा कुछ कुछ दिखने लगा था. लीडर- मेरे सामने. उसे विश्वास नहीं हो रहा था अपनी नज़रो पर

“जब आप किसी को अपनी पहचान नही बताते तो हमे क्यूँ बताई”

“बस एक सवाल पूछना था प्रकाश तुमसे? छोटा सा”

क्या सवाल. प्रकाश ने बोला पर उसे भीतर ही भीतर वो सवाल पता था पर शायद जवाब नही

“बाकि सबसे तो मुझे उम्मीद थी भी नहीं प्रकाश पर तुम…. क्यूँ?”

“इस क्यूँ का जवाब उसे भीतर ही भीतर काटता रहा है. और सच बात तो ये है कि उसके पास इस क्यूँ का कोई जवाब नहीं था. कहना तो चाहता था कि “मैं मजबूर था, आप तो विदेश चले गए मैं कहाँ जाता. शायद लीडर ने मुझे सिर्फ और सिर्फ  अपने अनुयायी के रूप में देखना शुरू कर दिया था, शायद इसलिए शायद कभी मेरी राय को न सुना, न समझा न माना”.

“आखिर में मैं कुछ भी नहीं कर पाया. न देश की सेवा न लीडर की सेवा. बिना किसी मकसद के मैंने दो दो विश्वासघात किये है. कहने को बहुत कुछ है- शिकायते, बहाने, तर्क, भावनाएं . पर कुछ कहने को जी नहीं चाहता”.

जब सामने से कोई जवाब नहीं आया तो बाबा उठ के जाने लगे. जाते जाते जूलियस सीज़र की ब्रूटस को कही गयी बात कह गए

“you  too brutus?”

और प्रकाश से कोई जवाब देते ना बना

 

 

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