-santosh kumar

१८ साल के अथक श्रम के बाद देश के “निष्पक्ष”, “कर्मठ” व “संवेदनशील” जांच अधिकारीयों को एक ऐसा साक्ष्य प्राप्त हुआ है जिससे हिरण की हत्या/प्राकृतिक मृत्यु सम्बन्धी केस का पूरा इतिहास मिल जायगा. विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि जांच में काले हिरण की नाभि से कस्तूरी की जगह एक चिट्ठी मिली है. माना जा रहा है कि ये चिट्ठी काले हिरण ने स्वयं मरने से  पहले लिखी थी. यहाँ हम पेश करने जा रहे है उसी चिट्ठी के कुछ अंश. पत्र की विश्वसनीयता का कोई दावा हम नहीं करते.

26 सितम्बर 1998,

जोधपुर, राजस्थान

जीवन में आपाधापी है

हर एक पल भारी है

इस दुनिया से परे ले जाता

हर मार्ग भी संसारी है.

आप हिरण प्रजाति वाले सोचेंगे ये हिरण तो शायर हो गया है, कुछ ये भी सोचेंगे कि ये तो बावरा हो गया है, पर सच कहूँ तो जीने की सारी आशाएं समाप्त हो गयी है. पुरखे इंसान के ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ा रहे है, और ऐसे में मानव व्यसन में शहीद हुए अपने भाई बंधु बड़े याद आ रहे है. न कोई मुआवजा न कोई सुनवाई, बिना पूछे हमारी ज़मीन हथियाई. जी भी रहे है तो उन्ही लोगों की दया से जिन्होंने हमें इस दशा में पहुंचाया. एक तो निरर्थक जीवन दूजा बगल वाली हिरनी ज़रा भी भाव नहीं देती, समझ नहीं आता “जिये तो जिये कैसे बिन आपके, लगता नहीं दिल कहीं बिन आपके”. कोई मेरे साथ खेलता नहीं है, सब दोस्त मुझे काला काला कहकर चिढाते है, “हम काले है तो क्या हुआ दिलवाले है”. इस देश में काले हिरणों का ऐसा अकाल पड़ा है लेकिन किसी को परवाह नहीं. मैं ज़िन्दगी से हार मान ही चुका था और मरने के हर उपाय करके थक चुका था तभी मेरे अँधेरे जीवन में प्रकाश की किरण की तरह आये- सलमान खान. मुझे आज ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरा मसीहा आ गया है, मुझे इस नरक से बाहर निकालने , मुझे जन्नत की सैर कराने.  जैसे ईश्वर अवतार लेते थे असुरो को तारने के लिए वैसे ही वो आये मेरे जंगल में, ईश्वर के दूत की तरह.

एक दिन जब जीवन से दुखी, वेद से लेकर फूको तक सब पढ़कर अपना दिमाग चकराने और बगल वाली हिरनी को अंतिम बार प्रेम प्रसंग में सम्मिलित करने के असफल प्रयास के बाद, मैं गहन चिंतन में व्यस्त था तभी एक गाडी मेरे से कुछ दूर आकर रुकी. गाडी से कुछ सजे धजे लोग बाहर निकले जिसमे से एक थे-सलमान खान. बन्दूक लेकर वो पेड़ो से फल तोड़ने आये थे शायद. और मुझे उसी क्षण अपने निर्वाण का मार्ग मिल गया. मैं जानता हूँ कि इससे ‘प्रेम’ की मूरत, संस्कारो की सूरत, आदर्शो का आधार, पूरे देश के प्यार, सबकी आन सबकी शान सबके एक भाईजान पर बहुत आरोप लगेंगे, उन्हें सफाई देनी होगी, उनपर बेबुनियाद आरोप लगेंगे, सब उन्हें कोसेंगे पर मुझे विश्वास है अपनी न्यायपालिका पर जो निर्दोष लोगों पर आंच भी नहीं आने देगी, मुझे विश्वास है अपने देश की जनता पर जो सलमान पर अगाढ़ प्रेम बरसाएंगे और हर उस आवाज़ की खिलाफत करेंगे जो भाईजान के विरुद्ध जायेगी. मुझे विश्वास है उन गरीबो पर जो सलमान के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तत्पर रहेंगे, और विश्वास है उन धनाढ्यों पर भी जो सलमान को निर्दोष साबित करने हेतु धन की परवाह नहीं करेंगे.  यही सोचकर मैं कूद पड़ा बीच में और फलो की तरफ जाती गोली को अपनी छाती में समाहित कर लिया. सलमान भाई के इस आखिरी तोहफे को अपने ह्रदय से लगा लिया. मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ भाई का जिनके बलबूते मुझे परम गति प्राप्ति हुई, मैं मोक्ष का पात्र बना. मैं भाईजान का सदैव आभारी रहूँगा. आखिरी साँसे लेते हुए ये अंतिम पत्र लिख रहा हूँ. मेरा इस समस्त विश्व से यही आह्वाहन है कि सलमान खान पर आरोप न लगा जाए बल्कि उन्हें सम्मानित किया जाए फॉर “being human”. मेरा दिल तो बगल वाली हिरनी ने कबका तोड़ दिया था, भाई की गोली ने बस साइज़ बढ़ा दिया घाव का, इनमे उनका कोई दोष नहीं. मेरी मृत्यु पूरी तरह प्राकृतिक है, एक टूटे दिल की सांस टूट गयी बस.

भाई तुम्हारी जय हो,

एक आम हिरण (मैं जानता हूँ आप लोग कितने बड़े रंगभेदी है सब मुझे काला हिरण बुलाएँगे)

प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सलमान खान ने अपने बयान में कहा कि हिरण की मृत्यु प्राकृतिक थी और वे पूरी तरह निर्दोष है. माना जा रहा है कि ऐसे ही पत्र की तलाश दूसरे हिरण की नाभि में भी हो रही है. माना ये भी जा रहा है कि अदालत ने ये सशक्त साक्ष्य स्वीकार कर लिया है. सलमान खान ने इसके लिए काले हिरण का शुक्रिया अदा किया है और वादा है कि अपने एन जी ओ being human के तले ऐसे जीवन से थके हारे हिरणों के उत्थान (व उठान ) के लिए कार्य किया जायगा.

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